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Vaastu For Kitchen

Vastu for Kitchen- वास्तु अनुसार रसोईघर

रसोईघर हमारे भवन का अभिन्न हिस्सा हैं, यह ऐसी जगह हैं, जहां स्वादिष्ट और पौष्टिक भोज़न पकाया जाता हैं। यही भोज़न ऊर्जा के रुप में पा कर शरीर व मन को सकारात्मक शक्ति व पोषकता मिलती हैं। यही सकारात्मक ऊर्जा मानसिक व शारीरिक रुप से व्यक्ति के ज़ीवन को प्रभावित करती हैं, जिससे व्यक्ति स्वस्थ व आन्नद महसूस करता हैं। अगर आप अपने परिवार को स्वास्थय व धन सम्बंधित परेशानियों से बचाना चाहते हैं, तो रसोई को वास्तु अनुसार ही बनाए। घर की स्त्री का अधिकतर समय यही बितता हैं तो क्यों न स्वादिष्ट भोज़न और उनके स्वास्थय के लिए इसे वास्तु अनुसार बनाया जाये।

दिशा अनुरुप रसोई का चुनाव--  

  • घर में रसोईघर के लिए मुख्य दिशा दक्षिण-पूर्व (आग्नेय) दिशा हैं, यह अग्नि व राज़सिक ऊर्ज़ा की दिशा हैं। धन की इस दिशा में रसोईघर होने से पैसों का आगमन बना रहता हैं, व्यक्ति का कार्य में मन भी लगा रहता हैं।
  • दक्षिण दिशा में रसोई होने से व्यक्ति की यश-मान-प्रतिष्ठा में सदैव बढौतरी होती हैं।
  • पश्चिम दिशा में रसोई होने से व्यक्ति का स्वास्थय उत्तम रहता हैं और लाभपूर्ण प्राप्तियां करता हैं।
  • अन्य शुभ दिशा पूर्व हैं, यहां रसोई होने से धन व सामाजिक कार्य सुचारु से चलते रहते हैं। यहां रसोई धार्मिक स्थलों के लिए उपयुक्त रहती हैं।
  • दक्षिण-दक्षिण-पूर्व की दिशा में रसोई होने से परिवार के सदस्यों का आपस में प्रेम व विशवास बना रहता हैं, यहां भोज़न भी स्वादिष्ट और पौष्टिक बनता हैं।   
  • उत्तर दिशा में रसोई होने से धन व नए अवसर मिलने में रुकावट आती हैं। नौकरी में भी बाधा बनी रहती हैं।
  • उत्तर-उत्तर-पूर्व दिशा में रसोई होने से घर में कोई न कोई बीमार ही रहता हैं और व्यक्ति का अधिक धन दवाईयों पर ही खर्च होता हैं।
  • उत्तर-पूर्व (ईशान) दिशा में बनी रसोई मानसिक बीमारियां लाती हैं। व्यक्ति हमेशा भ्रम में रहता हैं और मानसिक रुप से परेशान व चिंतित रहता हैं। इंनसाईट में कमी रहती हैं और ज्ञानवान होते हुये भी खुद में कमी महसूस करता हैं। व्यर्थ धन खर्च होता हैं और दवाईयों का घर में आगमन बना रहता हैं। घर में किसी व्यक्ति को कैंसर तक हो सकता हैं।   
  • पूर्व-उत्तर-पूर्व दिशा में रसोई होने से व्यक्ति मनोरंज़न व मस्ती में लगे रहने के बाद भी चिड़चिड़ा ही रहता हैं। जिंदगी को खुल कर एंजॉय नहीं कर पाता हैं।  
  • पुर्व-दक्षिण-पूर्व दिशा में रसोई होने से व्यक्ति को मधुमेह व हाईपरटेंशन रहती हैं और परिवार के सदस्य आपस में बहस ही करते रहते हैं।
  • दक्षिण-पश्चिम (नैऋत्य) दिशा में रसोई होने से व्यक्ति अपने कौशल का सही से इस्तेमाल नहीं कर पाता, जिससे उसको कार्य-क्षेत्र और रिशतों में सफलता नहीं मिल पाती। यहां रसोई होने से पितृ दोष भी होता हैं।
  • दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम दिशा में रसोई होने से पिता-पुत्र के आपस में सबंध अच्छे नहीं होते।   वास्तु के अन्य आर्टिकल्स पढ़ने के लिए यहांं देखे! 
  • पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में रसोई ठीक हैं परंतु पत्नी की शिकायत अपने पति के लिए हमेशा बनी रहती हैं।
  • उत्तर-पश्चिम (वायव्य) दिशा में रसोई होने से व्यक्ति को ज़ीवन में किसी तरह का सहयोग नहीं मिल पाता हैं। उत्तर-उत्तर-पश्चिम दिशा में बनी रसोई पति-पत्नी के आपस के रिशते में खटास लाता हैं और विशवास में कमी लाता हैं।
  • कुछ ओर महत्वपूर्ण बाते जो रसोईघर के महत्वपूर्ण होती हैं।                  
  1. खाना बनाते समय मुख पूर्व की ओर होना चाहिए, गैस-चुल्हा आग्नेय दिशा में होना शुभ माना जाता हैं। जिससे भोज़न स्वादिष्ट और पौष्टिक बनता हैं।
  2. ईशान दिशा में पानी की सिंक होनी चाहिए। गैस व सिंक एक साथ नहीं होनी चाहिए क्योंकि पानी व अग्नि एक दुसरे के एंटी होते हैं। अगर ऐसा करना आवशयक हो तो दोनो के मध्य मिट्टी का कोई गमला रख दे।     
  3. माईक्रोवेव या ओवन को दक्षिण, पूर्व या आग्नेय में रखे। फ्रीज़ को उत्तर दिशा में रखे।  
  4. अलमारी को दक्षिण या पश्चिम या नैऋत्य की दीवार में रखे। कोई भी भारी सामान उत्तर, पूर्व या ईशान में न रखे।
  5. पीने का पानी और वाटर-फिल्टर उत्तर व ईशान दिशा में लगवाए।  
  6. रसोई में खिड़कियां उत्तरी या पूर्वी दिशा में होनी चाहिए ताकि प्राकृतिक रोशनी व हवा का संचार हो सके।
  7. रसोईघर में गैस के बिल्कुल सामने रसोई का दरवाज़ा नहीं होना चाहिए क्योंकि चुल्हे पर काम करने वाले की पीठ पर दरवाज़ा होना शुभ नहीं हैं।       
  8. रसोईघर को मंदिर और शौचालय के ऊपर, नीचे या सामने न बनाए। रसोईघर के सामने सीढियां भी नहीं होनी चाहिए। रसोईघर को शयन-कक्ष के पास भी न बनाए।    
  9. रंगो के चुनाव के लिए पीला, नारंगी, गुलाबी, संतरी, हल्का ब्राउन या हल्का लाल रंग उत्तम रहता हैं। छोटी रसोई हो तो रंग हल्के ही शुभ रहते हैं।    
  10. रसोईघर के ईशान या उत्तर की तरफ, अगर जगह हो तो तुलसी, धनियां, मेथी, कढी पत्ता या और आय्रुर्वैदिक के पौधे छोटे गमले के रुप में रख सकते हैं। 
  11. रात को सोने से पहले रसोई व सिंक को साफ कर के सोये। कोई भी झूठा बर्तन होने से नकारात्मकता होती हैं और अन्नपूर्णा माता नाराज़ होती हैं।    
  • इन सब बातों के अलावा आपके घर की रसोईघर अगर वास्तु अनुसार नहीं हैं, जिससे किसी भी प्रकार की समस्या का सामना करना पड़ रहा हैं, और उसका निज़ात आपको नहीं मिल पा रहा या आप समझ नहीं पा रहे हैं, तो ज़रुर आपके घर में वास्तु दोष हैं। आप वास्तु से जुडी किसी भी प्रकार की जानकारी के लिए हमसे सम्पर्क करे, हम बिना किसी तोड़-फोड़ के रंगो व आसान उपायों द्वारा आपके घर के वास्तु दोषों को कम करने की कोशिश करेंगे।      

Directions:--

उत्तर= उ०= North

उत्तर-उत्तर-पूर्व= उ०-उ०-पू= North-North-East

उत्तर-पूर्व= उ०-पू०= North-East

पूर्व-उत्तर-पूर्व= उ०-पू०-उ०= East-North-East

पूर्व=पू०= East

पूर्व-दक्षिण-पूर्व= पू०-द्०-पू= East-South-East

दक्षिण-पूर्व= द्०-पू= South-East

दक्षिण-दक्षिण-पूर्व= द्०-द्०-पू= South-South-East

दक्षिण= द्०= South

दक्षिण-दक्षिण-पश्चिम= द्०-द्०-प्०= South-South-West

दक्षिण-पश्चिम= द्०-प्०= South-West

पश्चिम-दक्षिण-पश्चिम= प्०-द्०-प्०= West-South-West

पश्चिम= प्०= West

पश्चिम-उत्तर-पश्चिम= प्०-उ०-प्०= West-North-West

उत्तर-पश्चिम= उ०-प्०= North-West

उत्तर-उत्तर-पश्चिम= उ०-उ०-प्०= North-North-West

 


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