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Rudraksh

Rudraksh  Importance of Rudraksh

रुद्राक्ष क्या है! रुद्राक्ष का महत्व 

रुद्राक्ष:- रुद्र शब्द भगवान शिव का नाम हैं और अक्ष का अर्थ हैं आंसु।

महाकाव्यों के अनुसार त्रिपुर नामक राक्षस बहुत अधिक शक्तिशाली और शैतान था। जब देवता मदद के लिए भगवान शिव के पास गये तब शिवजी ने उस राक्षस को नियंत्रित करने के लिए भयंकर अघोर नामक अग्नि शस्त्र का प्रयोग किया, जिससे बहुत ही विनाश हुआ। इस विनाश को देख कर शिवजी की आंखों से आंसू आ गये जिससे जहां भी वो आंसू गिरे वहां पेड़ उग आये और उनसे फल निकलने लगा जिससे भगवान शिव के आंसू से उसका नाम रुद्राक्ष पड़ गया। रुद्राक्ष के ये दाने भगवान शिव के आंसू हैं, जो लोगों के कष्ट देखकर उनकी आंखो से निकल आये, जिससे इन रुद्राक्ष को भगवान शिव का सर्वोप्रिय माना जाता हैं। यह रुद्राक्ष मानव जाति के लिए उपहार हैं।       

इन दानों पर कई खड़ी रेखायें होती हैं, और ये रुद्राक्ष के दाने कई चेहरे या मुख के होते हैं, जिससे प्रत्येक का अपना ही महत्व हैं। अलग-अलग मुख के आधार पर सभी का अलग-अलग प्रभाव होता हैं। रुद्राक्ष की 38 किस्में होती हैं और 21 मुखी तक रुद्राक्ष होते हैं।            हमसे बात करने के लिए क्लिक करे!

रुद्राक्ष के प्रत्येक मुख के अनुसार उपयोग और महत्व को जांते हैं!

एक मुखी: यह स्वयं शिव व सूर्य का प्रतिनिधित्व करता हैं इसका प्रतीक ईश्वरत्व चेतना और सर्वोच्च सत्य की प्राप्ति करना हैं। इसका आकार अर्धचंद्र के जैसा हैं और यह सबसे महंगा व दुर्लभ दाना हैं और इसकी मांग भी अधिक हैं यह विलासिता, शक्ति, धन, आत्मज्ञान, आत्मविश्वास और आध्यात्मिक संवर्धन को बढ़ाता हैं। इसे धारण करने से जातक भगवान शिव का सानिध्य पाता हैं।

जो जातक ये धारण करता हैं, वह सांसारिक सुखों से अप्रभावित रहता हैं और मानसिक एकाग्रता और सुकून पाता हैं।

जिन्हें सिर में दर्द, अस्थमा, टीबी, पक्षाघात, मानसिक चिंता, हड्डियों में दर्द, आंखों की समस्या और दिल की बीमारी हो उन्हें यह अवश्य धारण करना चाहिए।

यह सोमवार को चांदी में बनवा कर, चांदी की चैन में मंत्रों सहित (ओम नम: शिवाय, ओम ह्रीं नम:) गले में धारण करना चाहिए। इसे धारण के पश्चात किसी अपवित्र स्थान में नहीं जाना चाहिए।     

दो मुखी: यह रुद्राक्ष शिव पार्वती के अर्धनारीश्वर का प्रतीक हैं। यह रहस्यमयी शक्तियों को दर्शाने वाला चंद्र्मा व भगवान विष्णु का प्रतिनिधित्व हैं। इसे धारण करने से सभी तरह का क्रोध, निराशा, एकाग्रता में कमी जैसी नकारात्मकता समाप्त होती हैं और चंद्रमा के कमज़ोर प्रभाव नियंत्रित होते हैं। इसे धारण करने से आपस में सामंजस्यपूर्ण संबंध बनते हैं और पारिवारिक संबंधो में सुधार आता हैं।

यह रुद्राक्ष अपने भीतर ब्रह्मांड़ की सम्पूर्ण ऊर्जा का वहन करता हैं। इसका आकार गोल हैं और इसके दो मुख होते हैं।

इसके धारण करने से जातक पवित्र और शान्तिपूर्ण जीवन व्यतीत करता हैं और परिवार व वैवाहिक जीवन में एकता और शांति आती हैं।

जिनका मन पीड़ित रहता हैं और जिन्हें दिल, नपुंसकता, एकाग्रता में कमी, गुर्दे की विफलता, अवसाद, हिस्टीरिया, फेफड़े, मस्तिष्क, बाई आंख, गुर्दे और आंत की बीमारियां होती हैं, उन्हें भी ये धारण करने से राहत मिलेगी।

यह सोमवार के दिन लाल रंग के धागे में अपने गले में मंत्रों के उच्चारण सहित (ओम शिव शक्ति नम:) धारण करना चाहिए  

तीन मुखी – यह रुद्राक्ष गोल व तीन रेखाओं से युक्त होता हैं। यह त्रिमूर्ति ब्रह्मा, विष्णु और महेश का प्रतीक हैं जिससे यह पूरे ब्रह्माण्ड को अपने में समाये हुये हैं। यह सरस्वती का स्वरुप व अग्नि और मंगल ग्रह का प्रतीक हैं। तीन मुखी रुद्राक्ष पहनने से आत्मविश्वास बढता हैं और अवसाद व कठिन परिस्थितियों से निपटने में मदद मिलती हैं। यह शारीरिक शक्ति भी बढ़ाता हैं और बहुत सी बीमारियों के ईलाज़ में मदद करता हैं। यह तनाव व दुर्भाग्य को दूर कर गलतियों को सुधारने कर आत्मा को तृप्त करने में मदद करता हैं। यह मन को मज़बूत, आध्यात्मिक शक्ति, याद्दाशत और ज्ञान को भी बढ़ाता हैं।      किसी भी सवाल के लिए क्लिक करे!

यह अवसाद, सोज़ोफ्रेनिया, रक्त दोष, प्लेग, मनोविकार, मासिक धर्म का नियमन, बुखार, पीलिया, मानसिक विकलांगता, चेचक, पाचन समस्या, रक्तचाप, कमज़ोरी, गर्भपात और अल्सर जैसी बीमारियों को दूर करने के लिए पहना जाता हैं।   

यह रुद्राक्ष मंगलवार को लाल धागे में अपने गले में मंत्रों सहित (ओम क्लीं नम:) धारण करने चाहिए।

चार मुखी – यह रुद्राक्ष ब्रह्मा और बुध ग्रह का प्रतीक हैं। इसलिए इसको रुपम और चतुरानन भी कहा जाता हैं। यह रुद्राक्ष गोल चार धारी सहित होता हैं, जो ब्रह्म के चार पहलुओं को दर्शाती हैं, जिसमें ज्ञान, अर्थ, कर्म, भाग्य और स्वतंत्रता की अनंत खोज़ में मदद करता हैं। यह भाषा में सुधार जैसे हकलाने की समस्या या बोलने में शक्ति के लिए धारण किया जाता हैं। यह मन व शरीर को स्वस्थ रखता हैं और मानसिक शक्ति, बुद्धि, ज्ञान, एकाग्रता, यौन शक्ति और विपरीत लिंग के प्रति आकृषण बढ़ाने में मदद करता हैं। यह धारण करने से रचनात्मक शक्ति और ज्ञान को बढ़ावा देते हैं।         

यह रुद्राक्ष ध्यान, तार्किक सोच, सकारात्मक, सोच, रचनात्मक बुद्धि और बुद्धि के नियमन के लिए शुभ माना जाता हैं। यह वैज्ञानिक, शोधकर्त्ता, कलाकारों, पत्रकारों, लेखकों और बुद्धिजीवियों के लिए बहुत शुभ हैं।

यह मानसिक रोग, रक्त संचार, अस्थमा, हकलाना, पक्षाघात, रक्त परिसंचरण और खांसी से पीड़ित व्यक्तियों को पहनने की सलाह दी जाती हैं।

यह रुद्राक्ष सोमवार को दाहिने हाथ या गले में लाल धागे में मंत्रों सहित (ओम ह्रीम नम:) धारण करना चाहिए।          अपने बारे में जानने के लिए सम्पर्क करें।  

पांच मुखी – यह रुद्राक्ष पंचेश्वर शिव और काल अग्नि का प्रतीक हैं जो बृहस्पति ग्रह द्वारा शासित हैं। यह स्मृति को बढ़ाने में मदद करता हैं और धारण करने से याद्दाशत मज़बूत रहती हैं जिससे मन भी शांत रहता हैं। यह सभी दानो में मुख्य हैं क्योंकि यह पांच मुखी रुद्राक्ष पांच मुख्य पापों जैसे काम, क्रोध, लोभ, मोह और अहंकार को नष्ट करता हैं। यह रुद्राक्ष एकाग्रता और ज्ञान के स्तर को बढ़ाता हैं। यह जीवन के बहुत से क्षेत्रों में सफलता, ज्ञान, प्रसिद्धि, और लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता हैं। वास्तव में यह जीवन की खुशी और अनंत आनंद की प्राप्ति में मदद करता हैं। इसको धारण करने से अधिकतम भौतिक लाभ की प्राप्ति होती हैं। यह मानव शरीर के सभी चक्रों को संतुलित बनाये रखने में मदद करता हैं। 

पांच मुखी रुद्राक्ष दिल, जिगर, गुर्दे, पैर, पाईल्स, ह्रदय की समस्या, क्रोध, जांघ, कान, रक्तचाप, तनाव, मधुमेह, मोटापा, अस्थि मज़्ज़ा आदि पीड़ित लोगो के लिए शुभ रहता हैं। ऐसा भी कहा जाता हैं इसको धारण करने वाले को असमय मौत का ड़र नहीं रहता हैं।     रत्नों के बारे में जानने के लिए यहां देखें!

आंवले के आकार के तीन पांच मुखी रुद्राक्ष को सोमवार को लाल धागे में बांध कर मंत्रो सहित (ओम ह्रीम नम:) धारण करना चाहिए।

छ: मुखी – यह रुद्राक्ष भग्वान शिव के पुत्र कार्तिकेय और शुक्र ग्रह का प्रतीक हैं जिसे धारण करने से शिक्षा, ज्ञान और व्यक्ति की इच्छा शक्ति में वृद्धि करता हैं। कहा जाता हैं कि यह देवी पार्वती का आशीर्वाद हैं और संतान उत्पत्ति के लिए पहना जाता हैं। यह रुद्राक्ष धन, शक्ति, नाम व प्रसिद्धि के लिए धारण किया जाता हैं। यह धारण करके अनंत आनंद की अनुभूति का अहसास होता हैं। यह व्यवसाय की राह प्रशस्त कर पेशेवर और शैक्षणिक में सफलता दिलाता हैं। यह धारण करने से मेहनत करने वालो के सपने सच होते हैं। इसे धारण करने से रिश्ते मज़बूत होते हैं गलतफहमी भी दूर होती हैं जिससे भावनात्मक आघात में आये लोगो को उबरने में मदद मिलती हैं। यह धारण करने से सामंज़स्यपूर्ण संबंधों बनते हैं। यह सांसारिक दुखो से मुक्ति दिलाता हैं। जो चार मुखी और छह मुखी रुद्राक्ष एक साथ धारण करता हैं उसकी मानसिक शक्ति और चेहरे का तेज़ बढता हैं।     

यह रुद्राक्ष कम्पनी के प्रबंधकों, व्यापारियों, पत्रकारों और संपादको के लिए अच्छा होता हैं। यह एकाग्रता, मानसिक तेज़, इच्छा शक्ति. आत्मविश्वास, आत्म-सम्मान और सद्द्भाव को बढ़ाने में मदद करता हैं। यह धारण करने से सफलता, शारीरिक शक्ति, विलासिता, ज्ञान, धन, नाम, आकृषित व्यक्तित्व, समृद्धि, आनंदित पारिवारिक जीवन और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण की प्राप्ति होती हैं।

जिन में नकारात्मक ऊर्जा, मिर्गी, स्त्री रोग, प्रजनन अंगों की समस्या, मूत्र समस्या या संतान प्राप्ति में कठिनाई हो उनके लिए यह फायदेमंद होता हैं।

यह तीन दाने रुद्राक्ष लाल धागे में कार्तिकेय के मंत्रों का जाप करते हुए दाहिनी भुजा में धारण करना चाहिए। (ओम ह्रीम हम नम:)

सात मुखी - सात मुखी रुद्राक्ष नागो के राज़ा शेष नाग जो भग्वान अनंग शिव का अवतार माना जाता हैं, सात चेहरो में से प्रत्येक एक सांप को प्रतिंनिधित्व करता हैं। यह देवी महालक्ष्मी और शनि ग्रह द्वारा भी शासित हैं। रुद्राक्ष अपनी ईच्छाओ की पूर्ति और शैक्षिक समृद्धि के लिए बहुत ही उपयोगी हैं। सात मुखी रुद्राक्ष धन कमाने, समृद्दि और मन की शांति प्राप्त करने में मदद करता हैं। यह इतना शुभ हैं की घातक बीमारियों और मृत्यु को दूर कर दीर्घायु होने का आशिर्वाद देते हैं। इसको धारण करने वाले को अच्छा आर्थिक लाभ, स्वास्थय, प्रसिद्दि, शांति, रोगो से मुक्ति और मानसिक तनाव के लिए बहुत सकारात्मक हैं। यह व्यापारियों को अपने मंदिर या लॉकर में अवश्य रखना चाहिए।

यह शारीरिक कमज़ोरी, शूल पीड़ा, हड्डियों, मांसपेशियों में दर्द, पक्षाघात, नपुंसकता, सांस की बीमारी और विकलांग लोगो के लिए फायदेमंद हैं।

यह रुद्राक्ष लाल घागे में सोमवार को मंत्र के जाप सहित (ओम नम:) धारण अर सकते हैं या लॉकर में रख सकते हैं।             अगर आप ज्योतिष सीखना चाहते हैं, तो यहां देखे। 

आठ मुखी – आठ मुखी रुद्राक्ष गणेशजी और राहु ग्रह का प्रतीक हैं। इस रुद्राक्ष को धारण करने से जीवन की कठिनाईयां और दुखों में कमी होती हैं चाहे वह शारीरिक हो या मानसिक। यह रिद्दि-सिद्दि की प्राप्ति के लिए और मोक्ष तक ले जाने में सहायक हैं। यह रुद्राक्ष धन और विलासिता की पूर्ति करता हैं। यह बुरी आत्माओं को दूर करने और बीमारियों से छुटकारा दिलवाता हैं। यह मन की ताकत, खुशी, प्रसिद्दि, आत्मविश्वास और प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाता हैं। यह धारण करने से मन व बुद्धि अनुशासित होती हैं और एकाग्रता बढती हैं।    

यह धारण करने से विष, मानसिक तनाव, पेट दर्द, तनाव, त्वचा रोग, चिंता, अवसाद, कमज़ोरी और नकारत्मकता दूर होती हैं। 

सफलता पाने के सोमवार को केवल एक मनका लाल धागे में धारण करना पर्याप्त हैं। (ओम गणेशाय नम:)

नौ मुखी – यह नौ मुखी रुद्राक्ष देवी नव दुर्गा, यम व केतु ग्रह का प्रतीक हैं जिसमें नौ देवी देवताओं की शक्ति समाहित हैं। शक्ति के उपासको को अपनी आत्म शक्ति और मानसिक एकाग्रता बढ़ाने के लिए यह अवशय धारण करना चाहिए। यह रुद्राक्ष आत्मविश्वास, खुशी, स्वास्थ्य, चरित्र, धन, संपत्ति, भौतिक सुख, सपने और महत्वकांक्षाओं को पूरा करने मदद करता हैं। यह धारण करने वाले ऊर्जावान बनते हैं। केतु ग्रह मानसिक थकान, गरीबी, लाचारी, मन और शरीर की निष्क्रियता का कारण हैं जिससे यह धारण करने से केतु के दुष्प्रभाव को कम किया जाता हैं।

यह नव मुखी मां दुर्गा की शक्ति और आशीर्वाद हैं जो मन व शरीर को ऊर्जावान बनाता हैं और मानसिक तेज़, सतर्कता, शारीरिक शक्ति व एकाग्रता, धैर्य, क्रोध पर नियंत्रण और संचार कौशल में वृद्धि करता हैं। इसको धारण करने वाले सम्मान, निड़रता, ऊर्जा, प्रसिद्धि, और जीवन को सफल बनाने में प्रेरित करता हैं।

यह धारण करने से बुखार, अज्ञात बीमारी, नेत्र विकार, त्वचा रोग, फेफडो के रोग, आंतो और शरीर में दर्द से निज़ात मिलती हैं।  

यह एक मनका चांदी में बनवा कर लाल धागे में सोमवार को मंत्रो सहित धारण करना चाहिए। (ओम ह्रीम हम नम:)

दस मुखी – दस मुखी रुद्राक्ष भग्वान विष्णु का प्रतीक हैं जो ब्रम्हाण्ड के संरक्षक हैं और उनके दस अवतार और हाथों का प्रतीक हैं। यह रुद्राक्ष धन अर्जित करने में सक्षम हैं। यह ताकत और जीवन शक्ति से जुड़ा हैं। यह रुद्राक्ष बहुत शक्तिशाली हैं जो हर तरह के भय को दूर करने मदद करता हैं। यह जीवन की खुशियों को आन्नद के साथ जीने में मदद करता हैं साथ ही आसपास के बुरे प्रभावों से रक्षा करता हैं और सुरक्षित अहसास देता हैं। इसको धारण करने से प्रतिकूल ग्रहों के बुरे प्रभाव, अनिष्ट शक्ति, दुर्भाग्य, दुख, और सांसारिक कष्टों से छुटकारा मिलता हैं। यह व्यवसाय में प्रसिद्धि और सफलता देता हैं। यह पहनने से सुरक्षा की भावना आती हैं और दिमाग स्वस्थ होता हैं।

यह हार्मोनल असंतुलित, मानसिक अस्थिरता, काली खांसी में धारण करना चाहिए।         कोई भी सवाल, तुरंत पाए जवाब!

यह सोने या चांदी में बनवा कर लाल धागे में रविवार को मंत्रों सहित धारण करना चाहिए। (ओम ह्रीम नम: व श्री नारायणाय नम: व श्री विष्णवे नम:)

ग्यारह मुखी – यह ग्यारह मुखी रुद्राक्ष अवतार रुद्र भगवान शिव और हनुमान के ग्यारहवां रुप का प्रतीक हैं। इसे धार्मिक अनुष्ठान में शुभ माना जाता हैं और संतो द्वारा पहना जाता हैं।  यह धारण करने से सभी तरह के ड़र और असुरक्षा दूर होती हैं। इसे सात देवताओं की शक्ति कहा जाता हैं। यह समृद्ध जीवन देता हैं और तनाव मुक्त जीवन जीने मदद करता हैं। यह संतान के लिए भी उपयोगी हैं।

यह रुद्राक्ष पहनने वाले समृद्ध जीवन जीते हैं और इच्छाओं को पूरा करते हैं। महिलाओं के पहनने से सौभगय का आशीर्वाद देते हैं। इसको धारण करने से बहुत से पापोंं का नाश हो कर पुण्य की प्राप्ति होती हैं। यह मोक्ष प्राप्ति में मदद करता हैं। यह हनुमान जी का भी प्रतीक हैं जिससे पहनने से शिक्षा, गुण, आत्मविश्वास, साहस, खुशी, चतुराई, निड़रता, स्वस्थ जीवन और ज्ञान प्राप्त होता हैं। इसको पूजा स्थल और आभुषणों के स्थान पर रखा जाता हैं जिससे यह धन और समृद्धि लाती हैं।

यह धारण करने से शरीर के दर्द, पीठ दर्द, यकृत रोगो, न्युरोसाईकोलॉजी में सुधार आता हैं। बहुत ही जल्दी राहत के लिए सिर पर धारण करे।

यह रुद्राक्ष सोने या चांदी में बनवा कर शिव लिंग को स्पर्श करवा मंत्रो के साथ लाल धागे में धारण करे। (ओम ह्रीम हम नम: व ओम श्री रुद्राय नम:)   

बारह मुखी – बारह मुखी रुद्राक्ष सूर्य का प्रतीक हैं। यह प्रभावशाली और शक्तिशाली पदों को प्राप्त करने के लिए बेहद उपयोगी हैं जिसे करिशमाई व्यक्तित्व के साथ जोड़ा जाता हैं। इसका प्रभाव एक मुखी रुद्राक्ष के समान हैं, यह सपनो को साकार करने और लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करता हैं। यह बहुत से खतरो और बुराईयों से सुरक्षा करता हैं। इसे धारण करने से आकृषण बढता हैं।

इसे धारण करने वाला सूर्य की गुणवत्ता, चमक और आगे बढने का आत्मविश्वास पाता हैं। यह मंत्री, प्रशासक, व्यवसायी और अधिकारी को धारण करना चाहिए। यह धारण करने वाले को धन, अधिकार, दुर्घटनाओं से सुरक्षा, निर्भयता, खुशी और ज्ञान देता हैं।

यह गैस्ट्रिक, रिकेटॅस, मानसिक विकलांगता, चिंता, आंतो की समस्याओं, फूड़ पाईप, ह्रदय रोग, फेफड़ो के रोग और त्वचा से संबंधित समस्याओं से सुरक्षा करता हैं।

यह सोने या चांदी में लाल धागे में मंत्रों सहित धारण करना चाहिए। (ऐं क्रौं स: रौं नम:)            जाने आपका करियर कैसा रहेगा।  

तेरह मुखी – तेरह मुखी रुद्राक्ष इंद्र, कामदेव व शुक्र ग्रह का प्रतीक हैं। यह रुद्राक्ष सांसारिक सुखों से मुक्ति दिलाने के धारण किया जाता हैं। इसे प्राप्त करना बहुत ही दुर्लभ और कठिन हैं। इस रुद्राक्ष में बहुत ही शक्ति हैं जो मोक्ष प्राप्त करने मदद करता हैं। इसका उपयोग आकर्षण बढ़ाने के लिए किया जाता हैं जिससे सामने वाला मोहित हो जाता हैं। यह स्वस्थ मन और शरीर देता हैं जिससे जीवन की विलासिता का आन्नद मिलता हैं। यह आठ सिद्धियों को प्राप्त करने में मदद करता हैं। इससे प्रेम, स्नेह, सौंद्रर्य और आकर्षण जैसे गुण मिलते हैं।

यह रुद्राक्ष चिकित्सा विज्ञान के शोधकर्ताओं और रसायनिक विज्ञान से जुड़े लोगो को पहनना चाहिए। यह धन, यश, प्रसिद्धि, सौभाग्य, सम्मान, अधिकार, आकृषण, उच्च सामाजिक पद, वित्तीय स्थिति और सांसारिक इच्छाओं को देता हैं। यह ध्यान, भौतिकता और आध्यात्मिक प्राप्ति के लिए सहायक हैं। इसमें सम्मोहन करने की शक्ति होती हैं जिससे दूसरे को लुभाने की क्षमता सशक्त होती हैं। इसे धारण करने से भाग्य नियंत्रित करने की शक्ति आती हैं।

यह मांसपेशियों के रोगो का इलाज़ करता हैं।

इसे सोमवार को चांदी में धारण करना चाहिए। (ओम ह्रीम नम:)

चौदह मुखी – यह रुद्राक्ष भगवान शिव के ग्यारवे रुप रुद्र व शनि का प्रतीक हैं। यह शक्तिशाली रुद्राक्ष आसानी से नहीं मिलता हैं यह जीवन की बाधाओं से मुकाबला करने में मदद करता हैं और अपने प्रयास से सभी स्थितियों में विज़यी होता हैं। बहुत ही मेंहनत व ध्यान से शक्ति और अधिकार के पदों को प्राप्त करने और छ्ठी इंद्री व अंतर्ज्ञान को विकसित करने में मदद करता हैं।  यह रुद्राक्ष शक्ति और अधिकार का प्रतीक हैं। इसके गुणो को कोई समझ भी नहीं सकता हैं क्योंकि यह बहुत ही शक्तिशाली रुद्राक्ष हैं। तभी इसे देव मणि कहा जाता हैं। देवता भी इसे बहुत धारण करते हैं। इसे धारण करने से शनि के नकारात्मक प्रभाव कम होते हैं और आध्यात्मिकता की प्राप्ति होती हैं। इसे धारण करने वाला अपने पूर्वाभास से भविष्य की घटनाओं को कह पाता हैं। यह पहनने से आपदाओं, व्याधियों, दुखों और चिंताओं से मुक्ति मिलती हैं। यह धन, मोक्ष, वित्तिय सुख, शक्ति, उत्साह प्रदान करवाता हैं। अगर संतान न हो तो दोनो स्त्री और पुरुष को यह धारण करना चाहिए।

यह सोमवार को सोने या चांदी में बनवा कर लाल धागे में छाती तक धागा या दाहिनी बांह पर पहना जाता हैं। (ओम शिवाय नम:)        

गणेश रुद्राक्ष – यह एक बहुत ही प्रभावशाली रुद्राक्ष हैं जो भगवान शैव व देवी पार्वती के पुत्र हैं जिससे भगवान गणेश का आशिर्वाद मिलता हैं। यह बहुत ही पूजनीय और पवित्र माना जाता हैं। इसके लिए बहुत ही सावधानी बरतने की जरुरत हैं। इस रुद्राक्ष में भगवान गणेश के सूंड़ के समान फैलाव जैसा प्राकृतिक कुंड़ होता हैं। इसके धारण करने से मार्ग से बाधाये कम होती हैं। जीवन के हर पहलू में पूर्णता प्राप्त होती हैं।

इसे पहन कर मानसिकता और बौद्धिकता में बल मिलता हैं। वाक-शक्ति और याद्दाशत को बल मिलता हैं। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोगो के लिए यह बहुत सहायक हैं।   

यह सोमवार को चांदी या सोने में बनवा कर लाल धागे में मंत्रो सहित धारण करना चाहिए। (ओम गण गणपत्ये नमो नम: , ओम गणेशाय नम:    

गर्भ गौरी रुद्राक्ष – गर्भ गौरी रुद्राक्ष देवी पार्वती और भगवान गणेश का प्रतीक हैं। इसका छोटा दाना गणेश जी और बड़ा दाना माता का प्रतीक हैं। जिन्हें गर्भधारण या संतान में समस्या आती हैं उन महिलाओ को इसे गले में धारण करना शुभ हैं। यह परिवार की एकता, माँ और बच्चों के बीच संबंधो को बनाये रखता हैं।

यह भी सोमवार को चांदी या सोने में बनवा कर धारण करना चाहिए। (ओम गर्भ गौरिये नम:)         जाने आपका स्वास्थ्य कैसा रहेगा। 

गौरी शंकर रुद्राक्ष – यह एक अत्यंत प्रभावशाली रुद्राक्ष हैं जो दो मोतियों से मिलकर बना होता हैं। यह भग्वान शिव और देवी पार्वती का संयुक्त प्रतिनिधित्व हैं। इसे ब्रह्मांड़ के विस्तार और विकास का कारण कहा जाता हैं जो प्रजनन क्षमता भी प्रदान करता हैं। यह चंद्रमा ग्रह का भी प्रतीक हैं। जो बहुत ही दुलर्भ रुप से मिलता हैं। यह रिशतों वैवाहिक जीवन व पारिवारिक जीवन में सुधार लाता हैं और जीवन में खुशी व सद्द्भाव लाते हैं। यह विपरीत लिंग में आकृषण और प्रेम को बढ़ाता हैं। इसे धारण करने पर या पास में रखने पर बहुत ही सावधानी रखने की आवशयकता हैं। जो इसे पूजा कक्ष में रखता हैं वह बाधा मुक्त, सुखी, पति-पत्नि में प्रेम और सफल पारिवारिक जीवन के सभी लाभों को पाता हैं। जो भगवान शिव में ध्यानमय होना चाहते हैं यह ध्यान में भी मदद करता हैं।

यह सोमवार को सोने या चांदी में धारण लाल धागे में पहना जाता हैं। (मंत्र:- ओम गौरीशंकराय नम:)    

Rudraksh रुद्राक्ष के बारे में कुछ जानकारी – आपके कुछ सवालों के जवाब-

  • रुद्राक्ष किसी भी धर्म के लोग पहन सकते हैं क्योंकि रुद्राक्ष में प्राकृतिक ऊर्जा होती हैं। बहुत से लोग इस पर विश्वास नहीं करते हैं लेकिन यह बहुत ही चमत्कारिक शिव का प्रतीक हैं।
  • यह 14 वर्ष की उम्र से ही धारण करना चाहिए क्योंकि बच्चे इसके महत्व को नहीं समझते।
  • प्रथम बार धारण करते समय उसे पवित्र करके प्रार्थना और अनुष्ठान से मंत्रों का जाप करके ही धारण करना चाहिए।
  • रुद्राक्ष को हमेशा चांदी और सोने में लाल धागे में गले में ही धारण करें। कंगन के रुप में कम ही पहने।
  • महिलाओं को मासिक धर्म के दौरान, मांस-मदिरा और सेक्स के समय यह नहीं धारण करना चाहिए। अंतिम संस्कार या नए बच्चे के के जन्म दौरान भी धारण नहीं करना चाहिए।
  • रुद्राक्ष को ग्रहों की कमज़ोरी को दूर करने के लिए पहना जाता हैं। यह वास्तु दोष को दूर करने के लिए धारण किया जाता हैं।
  • यह कार्य-स्थल या मंदिर में रखा जा सकता हैं।
  • यह नहाते और शौचालय के समय उतार देना चाहिए नहीं तो यह इसकी ऊर्जा को कम करता हैं।   
  • इसे धारण करके किसी भी तरह का ड़र खत्म हो जाता हैं तभी बहुत से साधु-मुनि अकेले जंगलो में घूमते रहते हैं।  

    आईये! जाने कि एक मुखी रुद्राक्ष के जादूई फल क्या हैं।

    रुद्राक्ष को भग्वान शिव का अंश माना जाता हैं, इस वज़ह से रुद्राक्ष का बहुत महत्व हैं, साथ ही ज्योतिष में भी इसका विशेष महत्व हैं। रुद्राक्ष की उत्पत्ति के लिए कहा गया हैं कि यह महादेव के नेत्रों से निकली हुई बुंदो का अंश हैं, जो तप करते हुये धरती पर गिरी थी, जिनसे रुद्राक्ष की उत्पत्ति हुई थी। आज हम बात कर रहे हैं एक मुखी रुद्राक्ष की, जिसका मिल पाना मुश्किल होता हैं। रुद्राक्ष को धारण करने से जातक को असीम शक्त्ति की प्राप्ति होती हैं। एक मुखी रुद्राक्ष का आकार काजु और अर्द्धचंद्रमा के आकार जैसा होता हैं। इस रुद्राक्ष के मुख पर एक ही रेखा होती हैं। ज्योतिष के अनुसार एकमुखी रुद्राक्ष का स्वामी सूर्य ग्रह हैं, इसलिए अगर कुंड़ली में सूर्य कमज़ोर हैं तो यह रुद्राक्ष धारण करना चाहिए, जिससे मान-प्रतिष्ठा के साथ उच्च पद की प्राप्ति होती हैं और व्यक्ति का आत्मविश्वाश बढ़ता हैं। सूर्य ग्रह का संबंध ह्रदय के साथ होने से एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने से अगर ह्रदय की कोई समस्या हो तो वह भी दूर होती हैं। साथ ही एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने से सिरदर्द, मानसिक रोग, हड्डियों की कमज़ोरी और आंखो की समस्याएं भी समाप्त होती हैं। अगर आप सरकारी नौकरी चाहते हैं या आपका सरकार से जुड़ा कोई कार्य रुका हुआ हैं तो आपको सफलता की प्राप्ति होगी। एक मुखी रुद्राक्ष धारण करने से लीडरशिप की क्षमता आती हैं और राज़नीत्ति में भी उच्च सफलता हासिल होती हैं। इसे धारण करने से मॉ लक्ष्मी की असीम कृपा भी प्राप्त होती हैं और धन के साथ समृद्धि मिलती हैं।           

    एक मुखी रुद्राक्ष गले में लाल धागे में चांदी में पिरो कर रविवार के दिन सूर्य और भगवान शिव के मंत्रो का जाप करके पहना जाता हैं।

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