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27 Nakshatra

Nakshatra नक्षत्र:- हमारे ब्रहमाण्ड में अनेक तारों के समुह हैं, जो चंद्रमा के पथ से जुड़े हैं, इस तारों के समूह को नक्षत्र कहते हैं। चंद्रमा 27 से 28 दिनों में पृथ्वी के चारों ओर यानि इन तारों के चक्कर लगाता हैं, इन्ही तारों के अलग-अलग समूह भी होते हैं, जिन्हें नक्षत्र कहा गया हैं। 28 नक्षत्र के इन समूह को नक्षत्र चक्र कहते हैं। हमारा ब्रहमाण्ड 360 अंशो का हैं, जिसमें प्रत्येक 27 नक्षत्र को 13 अंश 20 मिनट में बांटा गया हैं। प्रत्येक नक्षत्र के चार चरण होते हैं। बिना नक्षत्रों के फलित अधुरा होता हैं। जिस नक्षत्र में हमारा जन्म होता हैं, वही जन्म का नक्षत्र कहलाता हैं, इसी नक्षत्र द्वारा हम अपने चरित्र, सोच और अपने जीवन की दशा के बारे में जान पाते हैं, जो हमारे जीवन का सबसे महत्वपूर्ण पहलु होता हैं। वैदिक ज्योतिष का आधार नक्षत्र और ग्रह हैं जिससे राशियों और भावों  को समझा जा सकता हैं। हमारे ब्रहमाण्ड में 28 नक्षत्रों की व्याख्या की गई हैं जिसको 9 ग्रहों का स्वामित्व दिया गया हैं आईये इन के महत्व को समझे।   

1. अश्वनी नक्षत्र- इस नक्षत्र में उत्पन्न जातक अधिकतर शांत स्वभाव वाले होते हैं। वे अपना कार्य चुपचाप, बिना किसी को बताये करना पसंद करते हैं, ये अपने निर्णयों में हठी होते हैं। ये जातक अपने से प्रेम करने वालो पर सब कुछ न्यौछावर कर देने वाले होते हैं। ये परेशानियों में भी घबराने वाले नहीं होते बल्कि परेशानियों में घिरे अन्य लोगों की मदद करते हैं। ये अपनी आलोचना सहन नहीं कर पाते। अपना कार्य भी अपनी ही समझ से करते हैं तथा किसी से प्रभावित नहीं होते। जब ये किसी कार्य को करने की एक बार सोच ले तो कुछ भी हो जाए उस कार्य को कर के छोड़ते हैं। ये बुद्धिमान तो होते हैं, परंतु किसी कार्य को बहुत ही गहराई तक करने पर मानसिक परेशानी में भी उलझ जाते हैं। वह सदैव अपने वातावरण को अपने अनुकूल बनाने के इच्छुक रहतें हैं। यह बिना बात के हठीले भी होते हैं। ऐसा जातक हर काम में समझदारी दिखाने की कोशिश करता हैं। इनको संगीत के शौक के साथ साहित्य से भी प्रेम होता हैं। 30 वर्ष की आयु तक इनका जीवन संघर्षपूर्ण रहता हैं और छोटी-छोटी बातों के लिए भी कठिनाईयों का सामना करना पड़ता हैं। 55 वर्ष की आयु तक इनके जीवन में निरंतर उन्नति रहती हैं। कभी-कभी ये अपनी शान दिखाने के लिए आय से अधिक खर्च कर बैठते हैं। ये अपनी जरूरतों को किसी भी कीमत पर पूरा करने का निरन्तर प्रयास भी करते रहते हैं। ऐसा जातक अपने परिवार से प्यार करता हैं लेकिन अपने उत्तेजित व्यवहार के कारण उनकी घृणा का पात्र भी बन जाता हैं। उसे अपने पिता से वह स्नेह व देखभाल नहीं मिलती जिसका वह अधिकारी होता हैं अर्थात उसे पिता से उपेक्षा मिलती हैं। उसे जो भी प्यार और सहयोग मिलता हैं, वह माता से ही मिलता हैं। ऐसे लोगो को बाहरी व्यक्तियों से भी पूरी सहायता मिलती हैं। इनका स्वास्थ्य प्राय: ठीक रहता हैं। कभी-कभी सिरदर्द और ह्रदय रोग से परेशान रहते हैं।                                                            अन्य सवालों के जवाब के लिए हमसें मिलनें के लिए सम्पर्क करें।    

2. भरणी नक्षत्र:- भरणी नक्षत्र में जन्मे जातक साफ़-दिल और किसी का भी बुरा न चाहने वाले होते हैं। वे दूसरों की भावनाओं की परवाह न करते हुए किसी भी विषय पर अपने विचार प्रकट करने की प्रवृति वाले होते हैं। वह चापलूसी करके कुछ पाना नहीं चाहते। कोई भी काम हो, जो दूसरों की निगाहो में कितना भी अच्छा या बुरा क्यों न हो, जब तक उनका मन नहीं मानता वह नहीं करते हैं, इस वज़ह से उनको असफलताओं और विरोध का सामना भी करना पड़ता हैं। ऐसे लोग छोटी से छोटी बात पर भी अपने निकट और प्रिय व्यक्ति से नाता तोड़ लेने में हिचकते नहीं हैं, लेकिन जब ये अपनी गलती के बारे में जान जाते हैं, तब सारी पुरानी बाते भूल कर पहले जैसे सामान्य भी हो जाते हैं। इनमें व्यवहार कौशल की कमी होती हैं। ये कभी किसी के आधीन हो कर कार्य नहीं कर पाते हैं। इनका घमंड़ इनके लिए विपत्ति का कारण बन जाता हैं। किसी के सामने झुकना वह मरने के समान समझते हैं और जब किसी कारणवश इन्हें झुकना भी पड़ता तो ये अवसाद में आ जाते हैं। प्राय: ऐसे जातको को ज्ञान बहुत अच्छा होता हैं। ये किसी भी विषय की गहराई में जाने की क्षमता रखते हैं, इनकी समाज़ में एक अपनी चमक होती हैं, फिर भी इनको आलोचना तथा आर्थिक तंगी का शिकार होना पड़ता हैं। वह दूसरों पर अपनी श्रेष्ठता प्रकट करने और उन पर शासन करना पसंद करते हैं। इन्हें कदम-कदम पर रुकावटों और मुकाबलों का सामना करना पड़ता हैं। जिससे कभी-कभी इन्हें असफलताओं का मुख भी देखना पड़ता हैं। ये देखने में घमंडी लगते हैं, पर दिल के साफ व नर्म होते हैं। इनके जीवन में अधिकतर उतार-चढ़ाव रहता हैं। इनको अनावश्यक विवाद और प्रतिस्पर्धाओं से बचना चाहिए। अगर ये ज़िंदगी में आगे बढ़ना चाहते हैं तो अपने सिद्धांतो पर अड़े रहना इनके लिए मुसीबत का कारण बन सकता हैं। यह अफवाह बाजी तथा गप्पबाजी के शौकीन भी होते हैं। ये किसी से भी स्थाई सम्बन्ध नहीं बना पाते। 33 वर्ष की आयु के बाद इनके जीवन व वातावरण में तथा आजीविका में परिवर्तन होता हैं, ये किसी भी कार्य को करने में सक्षम होते हैं, विशेषकर प्रशासनिक कार्य, कलात्मक, व्यवसाय, कृषि तथा लघु उद्योग आदि में अधिक होते हैं। ये संगीत, खेल-कूद, कला-विज्ञापन, वाहन अथवा होटल आदि में अच्छी आय प्राप्त कर सकते हैं। ये अच्छे शल्य-चिकित्सक या न्यायाधीश भी बन सकते हैं। ये तम्बाकू के व्यवसाय में भी सफल हो सकते हैं। यदि वह अपने निवास की पूर्व दिशा में अपने व्यवसाय का स्थान बनाये अथवा पूर्व दिशा में यात्रा करे तो इन्हें हर क्षेत्र में सफलता मिलती हैं। 27 वर्ष की आयु में विवाह करने से सुखी दाम्पत्य जीवन मिलता हैं, इनका ज़ीवन साथी ग्रृहस्थ जीवन, प्रशासन और अच्छे आचरण में निपुण होता हैं। वह अपने परिवार से इतना प्रेम करते हैं, की उनसे दूर रहना नहीं चाहते। जातक अपने स्वास्थ्य की और से लापरवाह रहता हैं, फिर भी किसी गंभीर स्वास्थ्य समस्या का सामना करना नहीं पड़ता। ये अधिकतर दंतपीड़ा, मधुमह, शरीर दर्द, बुखार, रक्तघात, चमड़ी के रोग, मलेरिया आदि से पीड़ित हो सकते हैं। ये खाने-पीने में बहुत संयमी होते हैं। इनको जल से होने वाली दुर्घटना का भय रहता हैं, इसलिए इनको जलयात्राओं, नदी-तलाब, सागर आदि में स्नानादि के दौरान सावधान रहना चाहिए। अधिकतर इन लोगो की आँखों के पास या माथे पर चोट का निशान होता हैं।

3. कृत्तिका नक्षत्र:- ऐसा जातक अत्यंत बुद्धिमान होता हैं, फिर भी अपने लक्ष्य तक समय पर नहीं जा सकता। ऐसा जातक किसी भी काम से बहुत जल्दी उब जाता हैं और बिना आगे पीछे सोचे काम को छोड़ कर दूसरे काम को करना शुरू कर देता हैं। वह दूसरों को समस्याओं से निपटने के लिए अच्छी सलाह देने में सक्षम हैं, मगर अपने खुद के जीवन में निर्णय नहीं ले पाता हैं। वह अपने स्वाभिमान और आज़ादी के आगे आने वाली हर दोस्ती को ठुकरा देता हैं। ये लोग गलत तरीको से दया, यश या गलत धन से नाम कमाना नहीं चाहते। इनकी जरूरतें और इच्छाएं किसी की भी मोहताज़ नहीं होती हैं, फिर भी इनकी धन कमाने की योग्यता अनोखी होती हैं। ये अपने काम में कमी निकालना पसंद नहीं करते। स्वाभिमान के साथ आशावादी होना इनकी विशेषता होती हैं। किसी भी लक्ष्य के लिए कठिन प्रयत्न करना, इनकी प्रवृति का परिचायक हैं। ये रूढ़िवादी होते हैं, पुराने रिवाज़ों और अंधविश्वासों को नहीं मानते। अधिक प्रयत्न व कड़ी मेहनत करना इनका स्वभाव हैं। ये सबके लिए अच्छे कार्य करना चाहता हैं, लेकिन बहुत देर तक अपनी इच्छा पर टिक नहीं पाते। ये अपने जीवन में गंभीरता व ईमानदारी से रहना चाहते हैं, फिर भी इनको असफलता ही मिलती हैं, यही उनके पतन का कारण भी हैं। इनकी यही कमी कार्य करने की योग्यता पर प्रशनचिन्ह भी लगा देती हैं। ये अपने इस व्यवहार को सुधारना तो चाहते हैं, पर कर नहीं पाते। ये किसी से कोई भी वादा करते हैं, तो किसी भी कीमत पर निभाते हैं। छोटी-सी बात पर असफलता भी इनको कुंठित कर देती हैं, जिससे वह उत्तेजित भी हो जाते हैं और मानसिक संतुलन भी खराब कर लेते हैं। ये अधिकतर अपने जन्म स्थान पर नहीं टिकते अर्थात वह अपने रोज़गार के लिए विदेश में रहना पसंद करते हैं। व्यवसाय में साझेदारी इन्हें नहीं करनी चाहिए। ये लोग इंजिनियर, यौन रोगों के विशेषज्ञ, राजकोष विभाग अथवा ड्राफ्टमैन बनने का शौक रखते हैं। यदि इनकी व्यवसाय में रूचि होतो इन्हें सूत निर्यात, दवाईयां तथा साजसज्जा उद्योग से लाभ मिलता हैं। इन्हें अपने काम को तेजी से निपटाने की आदत ड़ालनी चाहिए अन्यथा ये पीछे रह जाएंगे। इन्हें जीवन में बड़ी पैतृक सम्पति मिलने का योग होता हैं। ऐसे लोग विवाहित जीवन में भाग्यशाली होते हैं। इनका साथी गृहप्रबंधन में कुशल, निष्ठावान तथा सदाचारी होता हैं। ज़ीवन साथी के स्वास्थ्य को लेकर ये बहुत चिंतित रहते हैं। इनको जीवन के विभिन्न पलों पर रुकावटों का सामना करना पड़ता हैं। ये अपने परिवार को लेकर बहुत भाग्यवान होते हैं और परिवार के साथ पूर्ण संतुष्टता व शांति से रहते हैं, इनको भाई-बहनों से अधिक माता का स्नेह मिलता हैं। इनके पिता धर्मपरायण तथा प्रसिद्ध व्यक्ति होते हैं, इनका ज़ीवन संघर्षशील रहता हैं और ज़ीवन में निरन्तर बदलाव का सामना करना पड़ता हैं। 25 से 35 वर्ष तथा 50 से 56 वर्ष की आयु का समय इनका अधिकतर अच्छा बीतता हैं। ऐसे जातक प्रेम विवाह करना पसंद करते हैं या अपने परिवार की परिचित लड़कियों से ही विवाह करते हैं। ये अच्छा खान-पान पसंद करते हैं, लेकिन इनकी खाने की अनिश्चित व अनियमित आदत इनके स्वास्थय के लिए हानिकारक भी होती हैं, इनको अधिकतर दांतो की परेशानी, कमजोर नेत्रदृष्टि, क्षय रोग, गैस, बवासीर, बुखार, मलेरिया, चोट अथवा दिमागी परेशानी जैसी बीमारियां परेशान करती हैं, इनका स्वास्थ्य कितना ही अच्छा या खराब क्यों न हो, न तो यह अपनी बीमारियों से घबराते हैं और न ही वह अपने स्वास्थ्य पर नियमित ध्यान देते हैं।   कोई भी सवाल! जवाब के लिए  यहां क्लिक करे!

4. रोहणी नक्षत्र:- इस नक्षत्र में उत्पन्न जातकों का सामान्य स्वभाव चिड़चिड़ा और एक बार क्रोधित होने पर जल्दी शांत नहीं होने वाला होता हैं। इनके निर्णय को कोई बदल नहीं सकता हैं। यदि कोई इनके विचारों तथा योजनाओं में अड़चन ड़ालता हैं, तो वह बहुत ही जिद्दी और दु:शासी हो जाते हैं। कोई इनके विचारों की अवहेलना करे तो ये उनकी हर सलाह को ठुकरा देते हैं। ये दूसरों में बुराई ढूंढ़ने की कोशिश करते हैं, जबकि खुद किसी निश्चित उदेश्य पर नहीं टिक पाते। वह दिमाग के बदले मन की सुनते हैं। ये अपने प्रिय के लिए जान तक लुटाने को तैयार रहते हैं व अपने विरोधी को नष्ट करने में कोई कसर भी नहीं छोड़ते हैं। ये अपने आप में ही संतुष्ट रहते हैं। झूठ को नकार कर सत्य को अपनाना इनकी विशेषता हैं। ये भविष्य से ज्यादा वर्तमान में जीना पसंद करते हैं। ये व्यवसाय में ही नहीं बल्कि सामजिक सेवा में भी सफलता प्राप्त करते हैं। ये लोग जो भी कार्य की जिम्मेदारी लेते हैं, उसे गंभीरता व् ईमानदारी से पूरा करने की कोशिश करते हैं, लेकिन इनमें क्षमाशीलता और धैर्य की कमी रहती हैं। इनके काम में योज़ना न होने के कारण असफलताओं का सामना करना पड़ता हैं। इनके विचारों की स्वतंत्रता ही इनके पतन का कारण बनती हैं। ये लोग जीवन में निम्न स्थान से उठ कर शिखर पर पहुंचने की क्षमता रखते हैं। ये दुग्ध, गन्ने के काम या कैमिकल इंजीनियर के रूप में धन कमा सकते हैं। 18 वर्ष तथा 36 वर्ष की आयु के बीच का समय इनके जीवन में एक तरह का परीक्षा का समय होता हैं। अधिकतर लोग जीवन के 38 से 50 तथा 65 वे 75 वर्ष के दौरान जीवन के उत्तम सुख भोगते हैं। इनको अपने कर्मचारी तथा साझेदारों से विशेषकर सावधान रहना चाहिए क्योंकि ये दूसरों पर विश्वास बहुत जल्दी कर लेते हैं। इनकी खुशहाली तथा सफलता इसी बात पर निर्भर करती हैं, अगर ये व्यक्ति पर विश्वास करने से पहले उसे अच्छी तरह जाँच परख लेते हैं। इन्हें रक्त की बीमारियां परेशान करती हैं, जिनमें रक्त दोष, ब्लड़ कैंसर, पीलिया, मूत्र की रुकावट, मधुमह, क्षय रोग, दमा, लकवा तथा गले की तकलीफ शामिल हो सकती हैं।     अपनी जन्म राशि जानें।

5. मार्गशीर्ष नक्षत्र:- इनमें एक विलक्षण सोच होती हैं, ये कुछ शक्की स्वभाव के भी होते हैं। ये दूसरों से सदभावपूर्वक व्यवहार करते हैं, यही व्यवहार दूसरों से भी चाहते हैं। इन्हें अपने मित्रों और रिशतेदारो के साथ व्यवहार में सावधानी बरतनी चाहिए क्योंकि इनका विश्वास करना फिर धोखा खाना, निराशा और पछतावे को जन्म देता हैं। बुराई करने वाले के साथ निपटने का ढंग इन्हे आता हैं। इनमें जागरूकता, नेतृत्व करने की योग्यता तथा बुद्धिमतापूर्ण कौशलता और उत्सुकता जैसी कई विशेषताएं होती हैं, लेकिन दूसरों के प्रति स्नेह के बदले इन्हें अवहेलना या उपेक्षा ही मिलती हैं। ये साधारण जीवन जीना पसंद करते हैं। इनके विचार निष्पक्ष तथा निष्कपट होते हैं। ये दूसरों के विचारों का सम्मान करते हैं, लेकिन उन्हें अपने निजी जीवन में कभी नहीं अपनाते। ये अपनी इच्छानुसार जीवनयापन करते हैं। ये स्वयं को साहसी तथा किसी भी साहसिक कार्य को करने में तैयार रहते हैं। इन्हें मानसिक शांति आसानी से नहीं मिलती, जिससे ये छोटी-छोटी बातो पर शीघ्र उत्तेजित भी हो जाते हैं। 32 वर्ष की आयु तक इनका जीवन गलतियों और चुनोतियों से भरा होता हैं तथा तूफान में फंसी हुई नौका की तरह इनकी मन की स्थिति होती हैं। 32 वर्ष की अवस्था के बाद, यदि ग्रह स्थिति अनुकूल हो तो, इनके जीवन में स्थिरता व संतोष की स्थिति आती हैं। ये अच्छी शिक्षा प्राप्त करते हैं, अच्छे वित्तीय सलाहकार होते हैं, दूसरों को मितव्ययता के लिए सलाह देते हैं, लेकिन स्वयं पर नियंत्रण नहीं रख पाते हैं और अंत में स्वयं को आर्थिक संघर्षो में फंसा पाते हैं। 32 वर्ष की आयु तक उतार-चढ़ाव का सामना करना पड़ता हैं। इस अवस्था  के बाद इन्हें व्यवसाय\रोज़गार तथा जीवन में सफलता मिलती हैं। पुराने काम छोड़ कर ये नए कार्य करना अधिक पसंद करते हैं, दूसरे शब्दों में ये कोई भी कार्य लगातार तथा स्थाई रूप से करने में असमर्थ रहते हैं। कुछ मामलो में देखा गया हैं, कि जातक किसी कार्य को करने में सक्षम हैं, मगर किस्मत की कुछ और ही इच्छा होती हैं, जिससे उसे असफलता का सामना करना पड़ता हैं। 33 वर्ष से 50 वर्ष की आयु का समय उनके लिए सफलतापूर्वक कार्यो का होता हैं, जिसमें पूर्ण लाभ मिलता हैं, लेकिन इस समय में वह जो भी अर्जित करते हैं, अगर उसे सम्भाल कर नहीं रखते, तो सब गवां भी देते हैं। इन पर अपने परिवार वालो का निश्छल प्रेम व स्नेह कोई प्रभाव नहीं ड़ालता। इनके जीवन साथी का स्वास्थ्य अच्छा नहीं रहता, जिससे वैवाहिक जीवन सौहार्द भरा नहीं रह पाता। इनका आपस में मनमुटाव बना रहता हैं। इनको बार-बार पेट की बीमारी, चोट, गले की हड्डी के पास कंधो में दर्द रहता हैं।

6. आर्द्रा नक्षत्र:- इन्हें जो भी कार्य मिलता हैं, वह पूरी जिम्मेदारी से करते हैं। लोगो में विनोदी बातो से आकर्षण का केंद्र बन जाते हैं। ये अच्छे मनोवैज्ञानिक होते हैं। मित्रो तथा परिजनों के साथ इनका व्यवहार प्रेमपूर्ण होता हैं। कुछ मामलों में यह भी देखा गया हैं की जातक अपनी सहायता करने वालो का आभारी नहीं होता और इनका व्यवहार भी सदा एक सा नहीं होता। इनमें अधिकतर विषयों के बारे में जानकारी प्राप्त करने की योग्यता होती हैं। फिर भी वह अपनी इस योग्यता से कोई प्रतिफल या प्रसिद्धि नहीं पा सकते हैं। अपने काम में ईमानदारी के कारण कोई छोटी सी परेशानी या मुशिकल पड़ने पर ये मानसिक रूप से पीड़ित हो जाते हैं। फिर भी आर्थिक या मानसिक परेशानी होने पर भी मानसिक संतुलन बनाये रखते हैं। इनका व्यवहार आकर्षक तथा सम्मानपूर्ण होता हैं, ये एक ही समय में कई कार्यो को आरम्भ कर सकते हैं। इनके कार्य करने का ढंग या तरीका किसी कार्य विशेष को पूरा करने के लिए अलग ही होता हैं, वह तरीका अगर ठीक भी हो तो भी दूसरों के अनुसार वह तरीका ठीक नहीं हो तो यह बात इनको बहुत प्रभावित भी करती हैं और ये दूसरों की बात मानते भी हैं, इसलिए इनको किसी भी अनुसंधान कार्य को अपने ही तरीके से करने पर ही कामयाबी प्राप्त होती हैं। ये एक समय में कई कार्यो को एक साथ करने तथा उन्हें सभी क्षेत्रों में पूर्णता के साथ निभाने की क्षमता रखते हैं। जातक अपना रोज़गार परिवार और घर से दूर रहकर करना ही पसंद करता हैं। 32 वर्ष से 42 वर्ष की आयु का समय इनके लिए सुनहरी समय हो सकता हैं। ये यातायात, जहाज, संचार-विभाग या उनसे सम्बन्धित उद्योग में कार्य कर सकते हैं और पुस्तक विक्रेता अथवा वित्तीय दलाल के रूप में भी आय अर्जित कर सकते हैं। इनका विवाह देर से होता हैं अगर विवाह जल्दी हो तो दंम्पत्ति का आपसी वाद-विवाद या किसी परस्थिति के कारण उसे परिवार से अलग रहना पड़ सकता हैं। ये अपनी समस्याएं किसी से बताते नहीं हैं, अगर इनका विवाह देर से हो तो इनका विवाहित जीवन बहुत अच्छा होता हैं। इन्हें कुछ असाध्य बीमारियां हो सकती हैं। जैसे लकवा, दिल, दन्त के रोग आदि व रक्त की विशेष बीमारी होने का योग बनता हैं।

7. पुर्नवसु नक्षत्र:- इनका व्यवहार वैसे तो अच्छा होता हैं, पर परिस्थितियों के अनुसार इनके व्यवहार में बदलाव आता हैं। इनके विचारों को जानना बहुत कठिन होता हैं। कभी ये खुश तो कभी क्रोधित भी हो जाते हैं। ये पुराने विचारों व मान्यताओं में विश्वास रखते हैं। वह किसी गैर-क़ानुनी काम में सहयोग नहीं देते, बल्कि दूसरों को भी ऐसा करने से रोकते हैं। वह दूसरों को कष्ट पहुंचाने की अपेक्षा जरुरतमंदो की सहायता करने की कोशिश करते हैं और साधारण जीवन व्यतीत करते हैं। इनको सांझेदारी के काम को छोड़कर हर क्षेत्र में सफलता मिलती हैं। ये शिक्षक, लेखक, अभिनेता, चिकित्सक आदि के रूप में नाम और मान अर्जित करते हैं। 32 वर्ष की आयु का समय इनके लिए ठीक नहीं होता, इसलिए इस अवस्था तक किसी महत्वपूर्ण व्यवसाय को नहीं करना चाहिए। वह धन संचय नहीं कर पाते, लेकिन सम्मान अर्जित करते हैं। इनके पास धन न होने का कारण इनकी स्पष्टवादिता तथा व्यवसाय की चालाकिया न होना हैं। इनके चेहरे पर मासूमियत तथा निराशा एक साथ दिखाई पड़ती हैं। ये माता-पिता के बहुत ही आज्ञाकारी होते हैं और माता-पिता तथा गुरु का सम्मान करने में आगे रहते हैं। इनका विवाहित जीवन अच्छा नहीं होता या तो अपने ज़ीवन साथी को तलाक तक दे देते हैं या उनके रहते दूसरा रिशता बना लेते हैं। इनके साथी का स्वास्थ्य इन्हें मानसिक रूप से परेशान करता रहता हैं। परिवार के अन्य लोगो से भी इनका मनमुटाव चलता रहता हैं। इस वज़ह से मानसिक रूप से परेशान रहते हैं।  इन्हें कोई गंभीर स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्या नहीं होती, फिर भी वह छोटी-मोटी बीमारियों से परेशान रहते हैं।

8. पुष्य नक्षत्र:- पुष्य नक्षत्र में उत्पन्न जातको को 15-16 वर्ष की अवस्था तक दरिद्रता का सामना करना पड़ता हैं, उसके बाद 32 वर्ष की आयु तक इनका समय उतार-चढ़ाव पूर्ण हो सकता हैं। जातक आजीविका के लिए अपने जन्म स्थान तथा परिवार से दूर रह कर काम कर सकते हैं, इनमें यात्रा की अधिक संभावना रहती हैं। इनके परिवार में बहुत-सी समस्याएं रहती हैं। इनको दैनिक जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहना पड़ता हैं। यह अपने ज़ीवन साथी व बच्चोंं के साथ ही रहना चाहते हैं। मगर कुछ परिस्थितियां उन्हें उनसे दूर रखती हैं। यदि इनका विवाह बिना जन्मकुंड़ली या बिना गुण मिला कर किया गया हो, तो विवाह में विवाद बना रहता हैं। ये अपने माता-पिता में आसक्त रहते हैं। शनि के इस नक्षत्र को सौभाग्य, समृद्धि तथा अन्य शुभता के साथ जोड़ा जाता हैं। नाम की तरह ही पुष्प की सौम्यता और सुन्दरता के संकेत मिलते हैं। ऐसे जातक लोगो की निस्वार्थ भाव से सेवा करना पसंद करते हैं। जातक में माता की तरह पोषण के गुण, संवेदनशीलता, सहनशीलता और भावुकता भी होती हैं। ऐसे जातक अपने ही प्रयास से बहुत सी सुख-सुविधा अर्ज़ित कर लेते हैं जिससे एक आरामदायक जीवन व्यतीत करते हैं और अपने परिवार की सभी आवश्यकताओं को समय से पुरा करते हैं। ये लोग धार्मिक प्रवृति के भी होते हैं तथा इनकी रुचि आध्यात्मिक विकास की ओर भी रहती हैं। 15 वर्ष की आयु तक इनका स्वास्थ्य ठीक नहीं रहता हैं। इनको पित्त, गेस्ट्रिक अल्सर, पीलिया, खांसी, एग्जिमा तथा कैंसर जैसे रोग होने की सम्भावाना रहती हैं।           अपनी स्वास्थ्य रिपोर्ट लेने के लिए यहां क्लिक करें।  

9. आश्लेषा:- ऐसे जातक गोपनीय, जोड़-तोड़, रहस्यकारी और षड़यंत्रकारी होते हैं, ऐसे जातक बदला लेने में आए तो कुछ भी नहीं सोचते हैं, फिर ये बहुत खतरनाक भी बन जाते हैं। इनके सामने कितना भी समझदार व्यक्ति बैठा हो, इनको समझ नहीं पाता हैं, इनका असली चरित्र समझ पाना कठिन होता हैं। ये अपने मन में चल रही गुप्त बातों को अपनों के साथ भी नहीं बांटते। ये अपने लाभ के लिए आसानी से किसी को भी धोखा दे सकते हैं, अपनी वाकपटुता से किसी को भी अपने जाल में फंसा लेते हैं। ये समाज़ में अपना विशवास बना कर अपना कार्य सिद्ध कर लेते हैं। ये लोग बहुत ही अच्छे व्यापारी, गहन विशलेषण करने वाले और संकट के समय को पहले ही भांप लेते हैं। ये आलौकिक व पारलौकिक शक्तियों से भी खुद को जोड़ लेते हैं। ऐसे लोग बहुत छिपे हुए प्रवृति के भी होते हैं जिससें इनकों समझना आसान बात नहीं हैं। ये अगर किसी से बदला लेने को आये तो पूरा ज़हर उगल देते हैं और सामने वाला तड़प तक जाता हैं जैसे किसी सांप ने डस लिया हो।   

10. मघा नक्षत्र:- ऐसा जातक बहुत मेहनती, बुजूर्गो का सम्मान करने वाला, धार्मिक तथा जीवन के आन्नद लेने वाला होता हैं। वह विभिन्न विधायों में परांगत तथा मृदुभाषी, शांत जीवन जीने का इच्छुक तथा विद्धवानों से मान प्रतिष्ठा प्राप्त करने वाला होता हैं। इन्हें विभिन्न कलाओं का अच्छा ज्ञान होता हैं। वह अपना बहुमूल्य समय सांस्कृतिक विकास में लगाते हैं तथा सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग भी लेते हैं। ये अच्छी तरह से विचार करके नियोजित ढंग से दूसरों से व्यवहार करते हैं और ये किसी की भी भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचाते। ये उन लोगो को भी पसंद नहीं करते जो दूसरों के कामो में रुकावट ड़ाल कर उन्हें परेशान करते हैं। इसी कारण जातक के जीवन में कई छिपे हुए शत्रु होते हैं जिससे वह क्रोधी स्वभाव का हो जाता हैं। वह वो कार्य नहीं करते जिसमें सत्य न हो। समाज व समुदाय के लिए कोई भी कार्य अपनी मानसिक तुष्टि के लिए करते हैं न की बदले में कुछ पाने की इच्छा के, जिससे जातक जनता की आँख का तारा बन जाता हैं। इनके पास धन सम्पति व सेवक भी होते हैं। इनमें स्पष्टवादिता तथा व्यापारी बुद्धि की कमी होने के कारण व्यवसायिक क्षेत्र में भौतिक सफलता प्राप्त नहीं हो पाती हैं। फिर भी ये ईमानदारी तथा परिश्रम का सही उदाहरण प्रस्तुत करते हैं। इनकी ईमानदारी तथा परिश्रम उतना फल नहीं देती जितना की मिलना चाहिए। जिससे व्यवसाय के कार्य-क्षेत्र को बदलने पर बाध्य हो जाते हैं। ये कभी नौकरी करते हैं तो कभी व्यापार करते हैं पर जब कोई निर्णय लेते हैं तो उस पर अडिग भी रहते हैं। अपने से वरिष्ठ व्यक्तियों के साथ इनके सम्बन्ध यांत्रिक ढंग के होते हैं। जातक प्राय: खुशहाल तथा सामंजस्यपुर्ण विवाहित जीवन का आनंद लेते हैं। परंतु शनि व मंगल का प्रभाव हो तो आन्नद नहीं रहता। जातक जिम्मेदारियों को भले ढंग से निभाता हैं। जातक के जीवन में शनि पर चंद्रमा का प्रभाव हो तो कैंसर रोग, अस्थमा, मिर्गी के रोग हो सकते हैं।

11. पूर्वफाल्गुनी नक्षत्र:- ऐसा जातक पूर्ण स्वतंत्रता चाहता हैं, वह किसी एक क्षेत्र में प्रसिद्धि प्राप्त अवशय करता हैं, फिर भी वह किसी न किसी कारण से मानसिक रुप से परेशान रहता हैं। उसमें दूसरों की परेशानियां ज्ञात करने की जन्मजात अनुभूति होती हैं। वह लोगों की मदद को आगे रहता हैं। जातक मृदुभाषी तथा यात्राओं का शौकीन होता हैं। किसी के साथ बंध कर काम न करने की विशेषता के कारण वह ऐसे कार्य अथवा पद ग्रहण नहीं करता जिनमें उसे दूसरों के समक्ष आधीनता में रहना पड़े। वह नौकरी में होने पर भी अपने अधिकारी की चापलूसी नहीं करते। इसी कारण उसे अपने वरिष्ठ अधिकारियो की कृपादृष्टि तथा अन्य लाभों से वंचित होना पड़ता हैं। वह प्रत्येक कार्य को ईमानदारी से करता हैं। वह अवैध कार्य करने वालो का साथ नहीं देता और न ही खुद ऐसे कार्यो को करता हैं। उसकी यह मानसिक स्थिति उसे परेशानियों में भी ड़ाल देती हैं फिर भी वह इनका सामना करने को तैयार रहता हैं। जातक दूसरों से कोई लाभ लेना नहीं चाहता। उसके कई परोक्ष शत्रु होते हैं, जो उसकी प्रगति में बाधा भी ड़ालते हैं। फिर भी वह ऐसे शत्रुओं का नाश करने में सक्षम रहता हैं और अपने हर कार्य में सफलता प्राप्त करता हैं। जातक अच्छा व्यवसायी होता हैं, वह अपने पद, गरिमा और शक्ति को पैसे से नहीं तोलता हैं। वह अपनी उन्नति का सही मार्ग चुनता हैं तथा उसमें अपना कीमती समय लगाता हैं। जातक योग्य और बुद्धिमान होता हैं, मगर फिर भी जिस स्तर पर वह पहुंचना चाहता हैं नहीं जा पाता। इसका यह अर्थ भी नहीं हैं की वह जीवन में उन्नति नहीं करता। रोज़गार क्षेत्र में वह प्राय: अपने कार्य बदलता रहता हैं। अपनी आयु के 22, 27, 30, 32, 35, 37, और 44वे वर्ष में परिवर्तन होता हैं। वह मनचाहे पद पर 45 वर्ष की आयु के बाद पहुंचता हैं। जातक दूसरों का धन नहीं चाहता फिर भी वह उनके कारण वित्तीय संकटो में फंसा रहता हैं। उधार लेने वाले इनका पैसा वापिस करने में परेशानी खडी करते हैं। इनका विवाहित जीवन सुखी रहता हैं। इनको अपने परिवार का भरपूर सुख मिलता हैं। वह विवाह अपनी पसंद के साथी से ही करता हैं। अगर शनि व मंगल के मेल हो तो जातक अपने परिवार व जन्मस्थान से दूर रहकर जीवन व्यतीत करेगा। इनका स्वास्थ्य सामान्यता ठीक ही रहता हैं। इनको कोई बीमारी हो तो वह दन्त रोग, पेट की समस्याए तथा मधुमह हो सकता हैं, जो स्थाई रोग नहीं होता।

12. उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र:- जातक प्रसन्नचित व आनंद मग्न रहना पसंद करता हैं। वह अपनी किस्मत का धनी होता हैं। जातक का व्यवहार सौम्य, गंभीर व ईमानदार होता हैं। जातक धार्मिक विचारों का होता हैं। अपने सामाजिक कार्यो द्वारा प्रतिष्ठा प्राप्त करता हैं। वह साफ़ दिल का तो होता हैं, पर क्रोधी स्वभाव का भी होता हैं और अधिक क्रोध में कुछ भी कर जाता हैं, फिर बाद में जब नम्र होता हैं तब इस बर्ताब के बारे में सोचता भी हैं लेकिन तब तक देर हो चुकी होती हैं, फिर भी वह किसी कीमत पर अपनी गलती नहीं मानता। यदि उसे उसकी गलती का यकीन दिलाया भी जाये तब भी वह इसे नहीं मानता। फिर भी उसमें अच्छी विवेचना शक्ति होती हैं और वह व्यवहार कुशल होता हैं। ऐसा जातक आज़ाद स्वभाव का होता हैं। वह जो भी जिम्मेदारी लेता हैं उसे पूरी तरह निभाता हैं, न तो वह दूसरों को धोखा देता हैं न ही उनसे धोखा खाता हैं। वह जनसम्पर्क के कार्यो में लीन रहता हैं। जनता से लेन-देन के कार्य से प्राप्त कमीशन द्वारा अच्छा पैसा कमाता हैं। वह एक बार जो निर्णय कर लेता हैं उसी पर अड़िग रहता हैं। अपने मेहनती स्वभाव के कारण वह अच्छी स्थिति प्राप्त करता हैं। वह शिक्षक, लेखक व वैज्ञानिक क्षेत्र में शोध करता हैं। इनका 32 वर्ष की आयु का समय बेहतर नहीं होता हैं पर 38 वर्ष की आयु तक इनकी ज़िंदगी में बहुत सुधार आता हैं। 38 वर्ष की आयु के बाद वह तेजी से उन्नति करते हैं और मनचाहा फल पाते हैं। 62 वर्ष की आयु तक उसका जीवन अच्छा चलता हैं। वह गणित, इंजीनियरिंग, खगोलशास्त्र, ज्योतिष शास्त्र में निपुण होता हैं। इनको वैज्ञानिक व्यवसाय में भी सफलता प्राप्त हो सकती हैं। इनका विवाहित जीवन अच्छा गुजरता हैं। वह अपने परिवारिक जीवन से संतुष्ट रहते हैं। यदि शुक्र व बुध साथ हो तो इनके दो विवाह होने के योग बनते हैं। इनका स्वास्थ्य सामान्य रूप से बेहतर रहता हैं, फिर भी वह शरीर दर्द, दांतो की समस्या व गैस आदि से पीड़ित रहते हैं। मंगल के गलत प्रभाव से जिगर की समस्याएं हो सकती हैं।  बाकी नक्षत्रों के बारें में जाननें के लिए यहां देखें!

13. हस्त नक्षत्र:- ऐसा जातक शांत स्वभाव का होता हैं। उसकी मुस्कान में एक विलक्षणता पाई जाती हैं, अर्थात उसकी मधुर मुस्कान में दूसरों को आकर्षित करने की चुंबकीय शक्ति होती हैं। वह जनता से सम्मान तथा आदर बड़ी आसानी से प्राप्त कर लेता हैं, वह बदले में बिना कुछ चाहे जरूरतमंद की सहायता करने को तैयार रहता हैं। वह किसी भी हालत में दूसरों को धोखा नहीं देता। अपनी इस विशेषता के बदले उसे कुछ नहीं मिलता हैं, यदि मिलता हैं तो केवल निंदा और विरोध। वह तड़क-भड़क जैसे पूर्ण जीवन में विश्वास नहीं करता। जातको का जीवन अकसर उतार-चढ़ाव पूर्ण होता हैं। एक पल में वह शिखर पर होता हैं तो दूसरे पल वह रसातल में पड़ा होता हैं, चाहे वह इनका व्यवसाय क्षेत्र हो अथवा मानसिक संसार। दूसरे शब्दों में सौभाग्य या दुर्भाग्य बिना बताए इन पर टूट पड़ते हैं। ऐसे जातक को स्थाई रूप से अमीर या गरीब की श्रेणी में नहीं रख सकते। जब वह किसी विशेष क्षेत्र में लक्ष्य के करीब पहुंचने वाले होते हैं, तब भी उल्ट परिणाम इनके भाग्य में रुकावट लाते हैं तो अचानक उन्हें सहायता प्राप्त हो जाती हैं और फिर से वह उस क्षेत्र में सफलता प्राप्त कर लेते हैं। ऐसा जातक दूसरों को दुःख देना नहीं चाहता, वही जब उसे दूसरों से पीड़ा मिलती हैं, तो वह बदला लेने की ताक में भी रहते हैं। अपने कार्य क्षेत्र में वह पूर्ण अनुशासन का पालन करता हैं। वे व्यवसाय में किसी औधोगिक संस्थान में उच्च पदों पर कार्य करना पसंद करते हैं। जातक अल्पशिक्षा के बावजूद भी हर क्षेत्र का अच्छा ज्ञान रखता हैं। वह किसी भी मामले में पीछे नहीं रहते हैंहैं। जातक में हर मामले को सुलझाने की क्षमता होने के कारण वह अच्छा सलाहकार हो सकता हैं। सफलता की पहली सीढ़ी पर चढ़ने से पूर्व उसे बहुत सी जिम्मेदारियां व फर्ज़ निभाने पड़ते हैं। उनकी आयु के 30 से 42 वर्ष तक का समय सुनहरी समय होता हैं, जब वह अपने जीवन में स्थिरता प्राप्त करते हैं। यदि जातक 64 वर्ष तक जीवित रहता हैं तो उसे व्यवसायिक क्षेत्र में चौतरफा सफलता मिलती हैं तथा वह असाधारण रूप से धन संचय करता हैं। जातक का विवाहित जीवन आनंद लेने योग्य होता हैं, फिर भी जैसा की हर परिवार की तरह मनमुटाव भी रहता हैं। 


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